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Home :>News - उत्तराखण्ड - उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी

उत्तराखण्ड

उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी

Aanchal
Last updated: 10/06/2026 08:25
Aanchal
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1200 675 26889217 thumbnail 16x9 d News Todayz उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी
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-विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार

“उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 हमारे राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हमारा उद्देश्य केवल विज्ञान और तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति मिलेगी: मुख्यमंत्री धामी

देहारादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी गई है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास और नवाचार को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नई नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक का प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया है। नीति का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाना है। इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो नीति के कार्यान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन का कार्य करेगा। इसके साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकेन्द्रीकृत संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा। नीति के अंतर्गत वैज्ञानिक जानकारी, शोध निष्कर्षों और संसाधनों तक सभी हितधारकों की सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक निधि से संचालित शोध कार्यों से प्राप्त डेटा का डिजिटल भंडारण किया जाएगा तथा इसे सभी हितधारकों तक सुरक्षित और सरल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार की “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” पहल के माध्यम से शोध और विज्ञान संबंधी अभिलेखागारों तक पहुंच भी उपलब्ध होगी। “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की अवधारणा को साकार करने के लिए तकनीक के स्वदेशीकरण और स्थानीयकरण को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप समाधान

नई नीति के तहत राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ा जाएगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल विकास हेतु अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के बीच सहयोग

नई नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और मिश्रित वास्तविकता (एमआर) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नई नीति के तहत जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्तियां संचालित की जाएंगी। राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

नवाचार वेधशाला

इसके अतिरिक्त राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी, जो सभी योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों से संबंधित जानकारी का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार होगी। अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे तथा नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा अधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी। उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 राज्य में विज्ञान आधारित विकास, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी तथा विकसित और सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

चुनौतियों के समाधान पर जोर

राज्य में विज्ञान प्रसार के लिए नोडल एजेंसी के रूप में उत्तररखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्वोगिकी परिषद (यूकॉस्ट) कार्य कर रही है। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के अनुसार उत्तराखडं वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के साथ ही हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति इन चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। प्रो दुर्गेश पंत के अनुसार यह नीति महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों को समान अवसर प्रदान करते हुए विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में समावेशी और समान भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

 

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By Aanchal
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आंचल ने MIT देहरादून से मॉस काम की पढ़ाई की है। इसके बाद विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम किया। अगस्त २०२३ से इस पोर्टल में बतौर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूर्सस हैं।
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