By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
News TodayzNews TodayzNews Todayz
  • Home
  • राज्य
    • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • अन्य विषय
    • पर्यावरण
    • शासन
    • अपराध
    • स्वास्थ्य
    • विविध
Search
© 2024 News Todayz Network. All Rights Reserved.
Reading: नंदा देवी कैलाश यात्राः असली परीक्षा अब निर्जन पड़ावों में
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
News TodayzNews Todayz
Font ResizerAa
  • Home
  • राज्य
  • राजनीति
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • अन्य विषय
Search
  • Home
  • राज्य
    • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • अन्य विषय
    • पर्यावरण
    • शासन
    • अपराध
    • स्वास्थ्य
    • विविध
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2024 News Todayz Network. All Rights Reserved.

Home :>News - उत्तराखण्ड - नंदा देवी कैलाश यात्राः असली परीक्षा अब निर्जन पड़ावों में

उत्तराखण्डविविध

नंदा देवी कैलाश यात्राः असली परीक्षा अब निर्जन पड़ावों में

Aanchal
Last updated: 16/09/2026 17:31
Aanchal
Share
d 16 News Todayz नंदा देवी कैलाश यात्राः असली परीक्षा अब निर्जन पड़ावों में
SHARE

चमोली। श्री नंदादेवी बड़ी जात अब उस कठिन हिमालयी क्षेत्र की ओर बढ़ रही है, जहां आस्था के साथ यात्रियों के साहस और सहनशक्ति की भी असली परीक्षा होगी। गुरुवार को यात्रा मार्ग के अंतिम आबादी वाले गांव वांण से आगे बढ़ते ही बड़ी जात निर्जन हिमालयी पड़ावों में प्रवेश कर जाएगी। गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल में हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना के बीच बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शौचालय, पैदल मार्ग और रात्रि विश्राम की पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाओं का अभाव बड़ी चिंता बन गया है। इस बार की यात्रा इसलिए भी असाधारण है कि श्री नंदादेवी बड़ी जात में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की उत्सव डोलियों के साथ बड़ी संख्या में नंदा छंतोलियां भी कैलाश की ओर बढ़ रही हैं। इनके साथ स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों और दूसरे राज्यों से भी नंदा भक्त यात्रा में शामिल हुए हैं। बुधवार सुबह से थराली-देवाल और ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल मार्ग से वांण की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला बना रहा।

सबसे बड़ी चुनौती वांण के बाद शुरू होगी। बड़ी जात को गैरोलीपातल अथवा वेदनी, आली बुग्याल, पातरनचैंणियां अथवा बगुवाबासा, शीलासमुद्र, जामुनडाली अथवा तातणा और नारिंग खोपड़ी जैसे निर्जन हिमालयी क्षेत्रों से गुजरना है। बड़ी जात में शामिल यात्रियों को कम से कम चार रातें ऐसे निर्जन पड़ावों पर गुजारनी पड़ सकती हैं, जहां सामान्य दिनों में स्थायी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

यही कारण है कि इस बार उमड़ रही अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए अस्थायी पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, शौचालय, आपात आश्रय और सुरक्षित पैदल मार्ग जैसी सुविधाओं की आवश्यकता कहीं अधिक महसूस की जा रही है। प्रशासन और पुलिस की सक्रियता हाल के दिनों में बढ़ी है, लेकिन दुर्गम पड़ावों में यात्रियों की संख्या के अनुपात में व्यवस्थाएं कितनी कारगर रहेंगी, इसकी परीक्षा अब होगी।

दरअसल, नंदादेवी की वार्षिक लोकजात और बड़ी जात की प्रकृति अलग-अलग रही है। सिद्धपीठ कुरूड़ से प्रतिवर्ष भाद्रपद में निकलने वाली लोकजात वेदनी बुग्याल तक जाती है और वहां से लौटकर नंदादेवी की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली में छह माह के प्रवास के लिए विराजमान होती है। सामान्य वर्षों में इसमें अपेक्षाकृत कम श्रद्धालु शामिल होते रहे हैं। इसलिए गैरोलीपातल अथवा वेदनी जैसे निर्जन पड़ावों पर सीमित संख्या में यात्रियों की व्यवस्था बड़ी समस्या नहीं बनती थी।

इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। 12 वर्षों के अंतराल पर होने वाली नंदादेवी राजजात को लेकर 2025 में बड़े स्तर पर तैयारियों की चर्चा शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री स्तर पर बैठकें हुईं और प्रशासन को 2026 की प्रस्तावित राजजात के लिए तैयारियां करने के निर्देश भी दिए गए थे। राजजात समिति नौटी की ओर से भी 2026 की यात्रा को लेकर तैयारियां की जा रही थीं। बाद में राजजात को 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

इसके बाद सिद्धपीठ कुरूड़ से जुड़े पक्षों ने 2026 में राजजात के स्थान पर नंदादेवी बड़ी जात आयोजित करने का निर्णय लिया। बड़ी जात आयोजन समिति पिछले करीब तीन महीनों से इसकी तैयारियों और प्रचार-प्रसार में जुटी रही। इसका असर अब यात्रा में दिखाई दे रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या ने स्थानीय लोगों और आयोजकों के अनुमान को भी पीछे छोड़ दिया है।

नंदानगर क्षेत्र से दशोली परगना की नंदादेवी, बण्ड परगना की नंदादेवी और ज्वालपा देवी की उत्सव डोलियां भी आगे बढ़ रही हैं। इनके अलावा विभिन्न गांवों और क्षेत्रों से आई नंदा छंतोलियां बड़ी जात में शामिल होकर कैलाश की ओर प्रस्थान कर चुकी हैं। इससे वांण से आगे यात्रा का स्वरूप और विशाल होने जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि पांच सितम्बर को कुरूड़ से बड़ी जात शुरू होते समय उमड़ी भीड़ के आधार पर तत्काल आकलन किया जाता तो वांण से आगे के चार प्रमुख निर्जन पड़ावों पर अस्थायी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और पैदल मार्गों को दुरुस्त करने के लिए कुछ समय उपलब्ध था।

फिलहाल बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह इन कठिनाइयों पर भारी दिखाई दे रहा है। दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी समितियों के साथ चल रहे यात्रियों का भरोसा अपनी आराध्य नंदा पर है। 2000 और 2014 की राजजात में शामिल रह चुके अनुभवी यात्री गद्दे, स्लीपिंग बैग, गर्म कपड़े और सूखे खाद्य पदार्थ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन पहली बार इस कठिन मार्ग पर जा रहे श्रद्धालुओं के सामने चुनौतियां अधिक हो सकती हैं।

नंदादेवी की बड़ी जात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हिमालयी लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब जब हजारों श्रद्धालु देवी के साथ निर्जन हिमालय की ओर बढ़ रहे हैं, बड़ी जात का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। आने वाले चार-पांच दिन यह भी बताएंगे कि अपार जनआस्था के इस प्रवाह के बीच दुर्गम हिमालय में व्यवस्थाएं कितनी साथ दे पाती हैं।

अनुमान है कि 17 सितम्बर को गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल क्षेत्र में हजारों नंदा भक्त एकत्र हो सकते हैं। श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी समिति बधाण-थराली के कार्यक्रम के अनुसार बधाण की नंदादेवी डोली सप्तमी को वेदनी कुंड में तर्पण और नंदादेवी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सिद्धपीठ देवराड़ा के लिए लौटेगी। दूसरी ओर दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियां बड़ी जात के तहत आगे होमकुंड की ओर प्रस्थान करेंगी। यात्रा का यही चरण सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। वेदनी से आगे पातरनचैंणियां, बगुवाबासा, शीलासमुद्र, तातणा और नारिंग खोपड़ी जैसे पड़ाव पूरी तरह निर्जन और उच्च हिमालयी क्षेत्र में हैं। मौसम में अचानक बदलाव, कम तापमान और कठिन पैदल मार्ग यहां सामान्य बात है। ऐसे में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। बधाण की नंदादेवी डोली के थराली पहुंचने के बाद पुलिस और प्रशासन की सक्रियता जरूर बढ़ी है। अधिकारी और पुलिसकर्मी यात्रा के साथ आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन निर्जन क्षेत्रों में उनके सामने अपनी रसद और ठहरने की व्यवस्था की भी चुनौती है। इसलिए सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए आपात स्थिति में सहायता और बुनियादी सुविधाएं किस स्तर तक उपलब्ध हो पाएंगी।

Post navigation

Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
By Aanchal
Follow:
आंचल ने MIT देहरादून से मॉस काम की पढ़ाई की है। इसके बाद विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम किया। अगस्त २०२३ से इस पोर्टल में बतौर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूर्सस हैं।
Previous Article 16 q News Todayz अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, तीन स्थानों पर सीलिंग, दो जगह ध्वस्तीकरण अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, तीन स्थानों पर सीलिंग, दो जगह ध्वस्तीकरण

Contact

स्वामी /संपादक

अनिल पैन्यूली

ईमेल : newsindiamail@gmail.com

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

You Might Also Like

उत्तराखंड के मीडिया दल ने एनटीपीसी भ्रमण में देखी राष्ट्र के विकास की तस्वीर

अशुद्धिकरण, भ्रष्टाचार और पावन धामों पर झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का नकाब उतारेगी भाजपा

मुख्यमंत्री धामी की सुरक्षा को लेकर  इंटेलीजेंस ने कसी कमर

सीएम धामी ने दिव्यांग बच्चों के साथ मिलकर मनाया अपना जन्म दिन

रुड़की में अग्निवीर भर्ती की तैयारी पूरी

News TodayzNews Todayz
© 2024 News Todayz Network.. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?