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Home :>News - उत्तराखण्ड - धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की बड़ी तैयारी

उत्तराखण्डविविध

धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की बड़ी तैयारी

Aanchal
Last updated: 20/09/2026 17:10
Aanchal
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10 j News Todayz धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की बड़ी तैयारी
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देहरादून। उत्तराखण्ड को देश का रोपवे हब बनाने की बड़ी तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेज कर दिया गया है। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में प्रदेश में लगभग 160 किमी लंबाई के 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन कनेक्टिविटी का विकास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प है। इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई सेवाओ के साथ ही अब रोपवे कनेक्टिविटी को रफ्तार दी जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन साधन है। इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी 09 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के कड़े रुख को देखते हुए अब परियोजनाओं का काम रफ्तार पकड़ रहा है।

क्यों जरूरी हैं रोपवे परियोजनाएं

उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते वर्ष 2025 में 06 करोड़ 03 लाख से अधिक पर्यटकध्तीर्थयात्री यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था जरूरी है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।

इन एजेंसियों के जिम्मे हैं रोपवे परियोजनाएंः राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम व पर्यटन विभाग।

प्राथमिकता में छह परियोजनाएं–सोनप्रयाग-केदारनाथ (रुद्रप्रयाग), -गोविंदघाट- हेमकुंड साहिब (चमोली), -रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैची धाम (नैनीताल), -कनकचैरी-कार्तिक स्वामी (रुद्रप्रयाग),-जोशीमठ-औली-गोरसों (चमोली) -रैथल-दयारा बुग्याल (उत्तरकाशी) शामिल हैं।  मसूरी रोपवे का काम प्रगति परः देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस रोपवे के बनने से देहरादून से मसूरी तक का एक से डेढ़ घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में पूरा हो सकेगा।  जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवेः इस रोपवे के बनने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक की करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिल जाएगी। ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवेः उत्तर भारत का प्रमुख सिद्धपीठ है चंपावत जिले में स्थित पूर्णागिरि धाम। यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 01 अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। यह यात्रा भी कठिन पहाड़ी मार्ग से गुजरती है। रोपवे बनने से यात्रियों को राहत मिलेगी। फिजिबिलिटी स्टडी के लिए उत्तराखण्ड मैट्रो को हस्तांतरित रोपवे परियोजनाएं

जनपद अल्मोड़ाः रानीखेत-चैबटिया (4 किमी), कसारदेवी-अल्मोड़ा  (2.76 किमी), अल्मोड़ा-द्वाराहाट दूनागिरी मोटर मार्ग 14 किमी  (हनुमान मंदिर)-दूनागिरी मंदिर (.63 किमी), द्वाराहाट-कुकुछीना-पाण्डुखोली (1.9 किमी), चैखुटिया-तरगताल-कुकुछीना  (1.9 किमी)।

चैघानपाटा-बेस अस्पताल (1.5 किमी), बेस अस्पताल से नवीन कलक्ट्रेट  (1.35 किमी)।

जनपद नैनीतालः नवगढ़ क्लब तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर के नीचे  (01 किमी)। जनपद देहरादूनः ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा मसूरी  (2.5 किमी)।

-ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से जॉर्ज एवरेस्ट मसूरी (4.1 किमी)। -भनोट एस्टेट, कैमल बैक रोड से कैम्पटी फॉल, मसूरी (4.4 किमी)।-मल्टी लेवल पार्किंग से चिक चॉकलेट मसूरी, (0.23 किमी)।-जॉर्ज एवरेस्ट हाउस से भद्राज मंदिर, मसूरी (7.4 किमी)।

-टपकेश्वर महादेव मंदिर से गुच्चूपानी रॉबर्स केव (4.5 किमी)। -गुच्चूपानी से पैसिफिक मॉल (1.5 किमी)।

-पैसिफिक मॉल से पैसिफिक गोल्फ (3.7किमी)। -पैसिफिक मॉल से पुरुकुल (4.4 किमी)।-पैसिफिक गोल्फ से सहस्त्रधारा (1.5 किमी)

-रायपुर से मालदेवता (4.6 किमी)। -मालदेवता से धनोल्टी (15 किमी)।

सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के मुताबिक सबसे पहले ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से पौड़ी जनपद में स्थित नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर फोकस किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की लंबाई छह किमी होगी। पहले चरण में 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश में यातायात का दबाव काफी कम हो सकेगा। चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुँच आसान होगी बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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आंचल ने MIT देहरादून से मॉस काम की पढ़ाई की है। इसके बाद विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम किया। अगस्त २०२३ से इस पोर्टल में बतौर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूर्सस हैं।
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