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Homeराज्यहिमाचल प्रदेशसीएम जयराम बोले- अब सभी को कोविड-19 के साथ ही जीना होगा

सीएम जयराम बोले- अब सभी को कोविड-19 के साथ ही जीना होगा

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मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री।

  • एक तरफ प्रदेश में जहां मृतकों की संख्या 100 पार हुई
  • कोविड के प्रति लोगों को अवेयर करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है

सीएम ने कहा है कि कोविड-19 का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है, अब सभी को कोविड के साथ जीने का प्लान करना पड़ेगा। कोविड के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि जिसे संक्रमण के लक्षण दिखे, वे अस्पताल जाएं या स्वास्थ्य संस्थान तक जानकारी दें ताकि उनका इलाज हो सके। कोरोना के मामलों को बढ़ता देख, सुविधाएं भी बढ़ाने को कदम उठाए हैं।

विधानसभा के माॅनसून सत्र की समाप्ति पर जयराम ने कहा कि ये सत्र विधानसभा के इतिहास में सबसे अलग रहा है। आमतौर पर इस सत्र में 5 बैठकें होती हैं, इस बार 10 बैठकें हुई हैं। सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक था, क्योंकि ये अलग परिस्थितियों में आयोजित हुआ। सीएम ने कहा कि इस सत्र में नियम 67 में कोविड-19 पर चर्चा करवा कर प्रदेश ने इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि ढाई दिन तक चर्चा हुई। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा करने वाला हिमाचल पहला राज्य है।
जब सत्र होगा, पक्ष-विपक्ष में टकराव होगा:अग्निहोत्री
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जब-जब सत्र होगा पक्ष-विपक्ष में टकराव होगा, बात रखी भी जाएगी और सुनी भी जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के मुद्दे रहते हैं और उन्हें उठाना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नाते उनकी जिम्मेदारी लोगों की समस्याओं को सदन में रखना है। उन्होंने सीएम से कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष के पास वाॅकआउट का अधिकार है और इसका वे यूज करते हैं। अब सीमाएं खोलने के बाद कोरोना बढ़ेगा, ऐसे में सरकार जागरूक रहे। उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।

विपरीत परिस्थिति में हुआ ये सत्र रहेगा याद: परमार
विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि 10 दिवसीय सत्र आने वाले वर्षों के लिए एक इतिहास बनेगा। इन परिस्थितियों में यह सफल सत्र हुआ है। उन्होंने कहा कि 23 मार्च को बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था और फिर छह माह के बीच सत्र बुलाया जाना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि माॅनसून सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गया। नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पहली बार विधानसभा के इतिहास में लगा। 6 घंटे 25 मिनट तक कोरोना संकट पर चर्चा हुई और फिर मुख्यमंत्री ने इसका जवाब दिय

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