Won election with big announcements, now all the projects started falling one by one. | चुनाव जीता बड़ी-बड़ी घोषणाओं से, अब एक एक करके सारे प्रोजेक्ट गिरने लगे औंधे मुंह

हमीरपुर17 घंटे पहले

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  • हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में, आखिर क्यों चुप हैं बड़े नेता और सांसद
  • 69 नेशनल हाईवे का कोई अता पता नहीं }धनेटा की सुरंग भी अब बन गई सपना

(विक्रम ढटवालिया) चुनावी बेला पर बड़े बड़े प्रोजेक्टों की घोषणाएं करवाकर भाजपा नेताओं ने लोगों को सपने तो खूब दिखाए, वोट भी बटोरे। लीड के अंतर को भी पहले के मुकाबले और ज्यादा बढ़ाया। मगर अब ये बड़े प्रोजेक्ट औंधे मुंह क्यों गिरने लगे हैं। यह सवाल केवल आम जनता नहीं पूछ रही, सत्तारूढ़ भाजपा के निचले स्तर के नेता भी जानना चाह रहे हैं कि आखिर हो क्या रहा है। एक-एक करके यह प्रोजेक्ट धराशाही क्यों हो रहे हैं।

कोई बड़ा नेता तो इन सवालों का जवाब दे? मसला केवल मटौर-शिमला फोरलेन से हाथ खींचने का नहीं है। धूम-धड़ाके से तत्कालीन केंद्रीय परिवहन और सड़क मंत्री नितिन गडकरी जब हमीरपुर आए थे तो उन्होंने 69 नेशनल हाईवे बनाने की भी घोषणा की थी। यही नहीं, चुनावों की एंड बेला पर धनेटा में गंगाना धनेटा के दरमियां टनल के निर्माण की सैद्धांतिक मंजूरी के पत्थर के आधार पर भी काफी ढोल पीटे गए।

हमीरपुर में पीपी मोड पर बस अड्डे के निर्माण की भी चर्चा एक दो बार नहीं, अनेकों बार हुई है। यही नहीं, मेडिकल कॉलेज के अलग कैंपस के निर्माण का काम अब शुरू होने वाला है लेकिन उसके लिए भी 3 साल लग गए।

बड़े नेताओं की चुप्पी बरकरार

ऊना में फ्लाईओवर भी ठंडे बस्ते में चला गया है। ऊना-हमीरपुर के बीच ट्रेन पहुंचाने का ढिंढोरा जिस बड़े स्तर पर पीटा गया है। वह किसी से छिपा नहीं है। मगर अब सब कुछ शांत है। अशांत केबल जनता है और भाजपा का निचले स्तर का कुनबा। जो ना सवाल लेने लायक बचा है और ना ही देने लायक। मगर बड़े नेताओं की चुप्पी बरकरार है।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी ट्रेन को लेकर प्रदेश सरकार का शेयर नहीं मिलने की वजह से जिम्मेदारी प्रदेश सरकार पर छोड़ते हैं। अब फोरलेन चैप्टर क्लोज माना जा रहा है। लेकिन तीन संसदीय क्षेत्रों के सांसदों को इसका जवाब जनता को देना तो पड़ेगा। कांगड़ा, हमीरपुर और शिमला, तीनों क्षेत्रों के सांसद आखिर कब सफाई देंगे?

जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास क्यों किया?

यदि नए नेशनल हाईवेज बनाने ही नहीं थे, तो फिर घोषणाएं करवाकर हिमाचल के बड़े नेताओं ने जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास क्यों किया? इतनी बड़ी तादाद में एनएच की घोषणा करवाने के पीछे आखिर मंशा क्या थी? इस पर शुरू से ही भ्रम रहा जो अब लंबे समय के बाद टूट गया है।

फोरलेन के काम में एनएचएआई का हमीरपुर में दफ्तर खोल कर उस पर करोड़ों रुपए जो पिछले दो साल में फूंके हैं, उसका फायदा क्या हुआ? कोई सरकार से पूछे तो सही, क्या जवाब मिलेगा? अब हमीरपुर के बस अड्डे कि प्रदेश सरकार ढाई साल में कोई चर्चा कर नहीं पाई। स्थानीय नेता भी चुप हैं।

फिर से टेंडर के फेर में फंसा फोरलेन का काम

किरतपुर-नेरचौक फोरलेन का काम आधा-अधूरा फिर से टेंडर के फेर में फंसा है। तीन साल से प्रदेश सरकार और एनएचएआई तमाशा देख रही है। सही मायनों में यही सबसे महत्वपूर्ण सड़क है, जो मनाली को जोड़ेगी और दूरी इस पूरे मार्ग की घट आएगी।

नेर चौक से आगे मनाली तक काम अंतिम चरण में है, लेकिन असली काम अभी भी फंसा हुआ है। कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ चुनिंदा प्रोजेक्ट्स हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में नेताओं की आपसी खटपट की वजह से औंधे मुंह गिरे हैं। यदि ऐसा है तो फिर डबल इंजन की सरकार के मायने क्या हैं। क्या नेता एक दूसरे को लेकर जिस राजनीति पर सवार हैं, उसका जवाब जनता जानना नहीं चा रही?

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