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Home :>News - उत्तराखण्ड - इतिहास सिखाता लैंसडाउन शहर …

उत्तराखण्ड

इतिहास सिखाता लैंसडाउन शहर …

न्यूज टुडेज टीम
Last updated: 12/09/2025 15:44
न्यूज टुडेज टीम
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Lansdowne.jpg
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  • डी. के. बुडाकोटी

जब भी मैं अपने किसी मित्र या सहकर्मी के साथ अपने गृहनगर लैंसडाउन जाता हूँ, तो पहला सवाल यही होता है कि इस शहर का नाम लैंसडाउन कैसे पड़ा। संभवतः वे लोग जिन्होंने मेरे साथ यात्रा की, उन्होंने भारतीय इतिहास, विशेष रूप से ब्रिटिश काल का अधिक अध्ययन नहीं किया होता।

बहुत से लोगों ने हेस्टिंग्स, वेलेज़ली, कॉर्नवालिस, डलहौज़ी, मिंटो और माउंटबेटन जैसे प्रसिद्ध नामों को पढ़ा या सुना होगा, लेकिन लॉर्ड लैंसडाउन का नाम शायद नहीं सुना होगा। इसलिए मैं बार-बार बताता हूँ कि लॉर्ड हेनरी चार्ल्स कीथ पेटी-फिट्ज़मॉरिस, पाँचवे मार्क्वेस ऑफ लैंसडाउन, 1888 से 1894 तक भारत के वायसराय थे, और यह शहर उन्हीं के कार्यकाल में स्थापित हुआ था, इसलिए इसका नाम लैंसडाउन पड़ा।

इसके बाद स्वाभाविक रूप से अगला सवाल आता है — कि इसका पहले क्या नाम था और यह शहर कैसे बसाया गया। इस सवाल का उत्तर देने के लिए थोड़ा सैन्य इतिहास, विशेष रूप से गढ़वाल राइफल्स का इतिहास पढ़ना पड़ता है। तो मैं अनुमानित प्रश्न का उत्तर देना जारी रखता हूँ — कि गढ़वाल राइफल्स 1887 में अल्मोड़ा में बनाई गई थी और उसी वर्ष कालूडांडा में स्थानांतरित की गई, जो इस शहर का पूर्व नाम था। बिना पूछे ही मैं बता देता हूँ कि ‘कालूडांडा’ नाम गढ़वाली बोली से आया है, जहाँ ‘कालू’ का मतलब काला और ‘डांडा’ का मतलब जंगल होता है। कुछ बच्चों के लिए यह नाम “ब्लैक फॉरेस्ट” नामक पेस्ट्री जैसा लग सकता है!

यहाँ एक मेनवेयरिंग रोड और एक बाग भी है, जिसका नाम कर्नल ई. पी. मेनवेयरिंग के नाम पर है, जिन्होंने पहली बटालियन बनाई थी और गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट की नींव रखी थी।

सिर्फ सितंबर 1890 में कालूडांडा का नाम बदलकर लैंसडाउन रखा गया था। गढ़वाल रेजिमेंट की स्थापना, उस समय के भारत के कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल सर एफ. एस. रॉबर्ट्स की सिफारिश पर हुई थी।

मैं अपने मित्रों को सुबेदार बल भद्र सिंह की भूमिका के बारे में भी याद दिलाता हूँ, जिन्होंने फील्ड मार्शल के ए.डी.सी. के रूप में कार्य करते हुए उन्हें गढ़वाली लोगों के लिए एक अलग रेजिमेंट बनाने की सिफारिश करने के लिए राजी किया।

मैं साथ में आए बच्चों को यह भी बताता हूँ कि ‘वायसराय’ शब्द लैटिन उपसर्ग Vice (जिसका अर्थ होता है “के स्थान पर”) और फ्रेंच शब्द Roi (जिसका अर्थ होता है “राजा”) से मिलकर बना है। इस प्रकार वायसराय वह शाही अधिकारी होता था जो किसी देश का प्रमुख होता था और ब्रिटिश सम्राट का प्रतिनिधि होता था।

लैंसडाउन की कई सड़कों के नाम उन व्यक्तियों के नाम पर हैं जिन्होंने देश या शहर के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

ग्रिफिथ, व्हीटल, किचनर, मेनवेयरिंग, चैनर, कैसग्रेन, रैमसे और हचिसन जैसे व्यक्तियों के नाम पर सड़कें हैं और इन सभी ने भारतीय सेना या सिविल प्रशासन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

lansdowne banner2 News Todayz इतिहास सिखाता लैंसडाउन शहर ...

हेनरी रैमसे पहले असिस्टेंट कमिश्नर और फिर 28 वर्षों तक ब्रिटिश गढ़वाल और कुमाऊँ के कमिश्नर रहे। रैमसे ने पर्वतीय क्षेत्रों के प्रशासन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसी तरह यहाँ की कई सेना की बैरक लाइनों के नाम भी इतिहास को दर्शाते हैं। एवेट लाइन्स का नाम जे. टी. एवेट के नाम पर रखा गया है, जो 1887 में रेजिमेंट के पहले अधिकारियों में से एक थे। उन्होंने 1901 में दूसरी बटालियन की भी स्थापना की थी।

इसी प्रकार किचनर लाइन्स का नाम ब्रिटिश काल के प्रसिद्ध कमांडर-इन-चीफ के नाम पर रखा गया है। क्वीन लाइन्स का नाम रानी विक्टोरिया के नाम पर है। लैंसडाउन शहर में एक बाज़ार भी है जिसे “2/3 बाज़ार” (सेकंड-थर्ड बाज़ार) कहा जाता है।

इस नाम का उद्गम तीसरी गोरखा रेजिमेंट की दूसरी बटालियन से हुआ है, और प्रारंभ में गढ़वाल बटालियन की स्थापना इसी रेजिमेंट से की गई थी। जहाँ इन सैनिकों के लिए बाज़ार स्थापित हुआ, वह स्थान “2/3 बाज़ार” कहलाने लगा।

इस शहर में इतना अधिक इतिहास है कि इस पर एक संपूर्ण पुस्तक लिखी जा सकती है। यह शहर ब्रिटिश भारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है और यहाँ आने वाला कोई भी जिज्ञासु व्यक्ति अनायास ही इतिहास से रूबरू हो जाता है।

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स्वामी /संपादक

अनिल पैन्यूली

ईमेल : newsindiamail@gmail.com

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