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ऑनलाइन मोड़ की शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिये शिक्षा के मूल और मूल्यों को समझना आवश्यकः स्वामी चिदानन्द

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ऋषिकेश:  आज का दिन डिजिटल लर्निंग के लिये समर्पित किया गया है। डिजिटल क्रांति के कारण लोग सूचनाओं से सशक्त हो रहे हैं साथ ही इससेे अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सीखने की पद्धति में अद्वितीय विकास हुआ है।

कोविड-19 ने डिजिटल लर्निंग की उपयोगिता को और बढ़ा दिया है। विगत 1 वर्ष से लगभग पूरा विश्व डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से ही अपने सारे कार्यक्रम, शिक्षण और सम्मेलनों को आयोजित कर रहा है।
डिजिटल लर्निंग डे के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्ष 2020 में स्कूल बंद होने के कारण डिजिटल शिक्षण की उपयोगिता बढ़ी और इसकी गुणवत्ता में भी कई सुधार हुये।

अब डिजिटल शिक्षण केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहा है बल्कि इसमें पुस्तकालय और उच्च-गुणवत्ता वाली अनेक प्रशिक्षण सामग्री भी शामिल है।

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण निर्मित वर्तमान परिस्थितियांे से पूरी दुनिया बदल गई है। स्कूलय छात्र और शिक्षक सभी का नजरिया बदला और पढ़ने-पढ़ाने के तरीका भी बदला है अब पढ़ाई ऑनलाइन मोड पर आ गयी है।

पठन-पाठन की प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में आने से ब्लेकबोर्ड और क्लासरूम का स्थान मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन ने ले लिया ऐसे में बच्चों और युवाओं को शिक्षण और संस्कृति से जोड़ने की जिम्मेदारी और बढ़ गयी है।

स्वामी जी ने कहा कि इंटरनेट की विशाल और विस्तृत दुनिया है इसके माध्यम से बच्चों के पास सीखने के अनंत अवसर है वह अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ा सकते हैं परन्तु यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि वे इंटरनेट के विशाल ज्ञान के सागर से क्या ग्रहण कर रहें हैं।

पारंपरिक शिक्षा की तुलना में डिजिटल शिक्षा प्रभावी है परन्तु इस ओर भटकाव भी बहुत हैं अतः ऑनलाइन मोड की शिक्षा गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ शिक्षा के मूल और मूल्यों को समझना और बच्चों को समझाना नितांत आवश्यक है।

ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में एनीमेशन और ऑडियो-विजुअल के कारण प्रभावी एवं तेजी से ग्रहण करने क्षमता में विकास हुआ है। डिजिटल लर्निंग डे की शुरूआत छात्रों के सीखने की क्षमता और बेहतर परिणामों को प्राप्त करने के लिये की गयी थी लेकिन अब डिजिटल लर्निंग ने एक बिल्कुल नया स्वरूप प्राप्त कर लिया है क्योंकि स्कूल बंद रहें और बच्चे डिजिटल माध्यम से शिक्षण लेने को मजबूर है। आईये हम सभी मिलकर डिजिटल लर्निंग के साथ परम्परागत शिक्षा के महत्व को समझें और जीवन में आगे बढ़े।

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